जड़ों को फैलाये मैं हर पल को पकड़ रहा हूँ

जड़ों को फैलाये मैं हर पल को पकड़ रहा हूँ

जड़ों को फैलाये मैं हर पल को पकड़ रहा हूँ,

देखो किस तरह मैं खुद पर ही अकड़ रहा हूँ,

आया तो था मैं कुछ दूरियाँ मिटाने की खातिर,

मगर आज मैं ही गहरे रिश्तों को जकड़ रहा हूँ।।

– राही (अंजाना)

Previous Poem
Next Poem
Spread the love

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

5 Comments

  1. Vartika - May 21, 2018, 1:42 pm

    Bahut khub

  2. Mithilesh Rai - May 21, 2018, 9:24 pm

    Very good

  3. शकुन सक्सेना - May 22, 2018, 7:02 am

    Thanks sir n vartika ji

  4. ashmita - May 23, 2018, 9:32 am

    nice

  5. शकुन सक्सेना - May 23, 2018, 11:29 am

    Thank you asmita ji

Leave a Reply