जिंदगी का वो फसाँना

✋✋✋✋✋✋माँ का आशीर्वाद✋✋✋✋✋✋✋
जिंदगी का वो फसाँना
आज भी है याद मुझको
माँ की वो लोरी का गाना
आज भी है याद मुझको
जिंदगी के काफिले मे
ताजशाही कम नही है
माँ तुम्हारी ही दुआ है
जिंदगी मे गम नही है
माना मैने इस जहाँ की
दुआ मुझपर कम नही है
माँ तुम्हारी दुआ सा अब
इस दुआ मे दम नही है
तेरी दुआ से है हजारों
साथ मंजिल काफिले मे
माँ तुम्हारे जैसे कोई
अब यहाँ हमदम नही है
तेरा वो माथा चूमना
और दर्द का काफूर होना
इन हकीमों की दवाओं मे
कही वो दम नही है
सैकड़ों नुस्खे हकीमों की
दुकाने है शहर मे
माँ तुम्हारी गोद सा
अब दर्द का मरहम नही है। ( शेष समय पर )
अखिलेन्द्र तिवारी कवि
श्री रघुकुल विद्यापीठ सिविल लाइन गोण्डा
उत्तर प्रदेश

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2 Comments

  1. ज्योति कुमार - September 6, 2018, 1:31 am

    Nice

  2. राही अंजाना - September 9, 2018, 12:45 pm

    Waah

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