जानता है दिल…

आपकी ख्बाहिसों को
पूरा करना
जानता है दिल,

चले आओ
सजा लें हम
किसी दिन,
स्वप्न की
महफिल ।

जानते हैं सभी,
सपनों को इक दिन,
टूटना पड़ता,

टूटता तन, टूटता मन,
छूट जाती है,
हर मंजिल ।

जानकी प्रसाद विवश

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1 Comment

  1. ashmita - February 12, 2018, 11:36 am

    Nice

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