छुपा है चाँद बदली में…

छुपा है चाँद बदली में…

छुपा है चाँद बदली में ,अमावस आ गयी है क्या?
नहीं देखा कभी जिसको वही शर्मा गयी है क्या?
मिलन की रात में ये घुप्प अँधेरा क्यों सताता है ?
वो मेरा और उसका छुप छुपाना याद आता है..
अभी तो थी फ़िज़ा महकी , क़यामत आ गयी है क्या?

कभी वो थी कभी मैं था, कभी चंचल चमकती रात,
 न वो कहती ,न मैं कहता मगर आँखे थी करती बात..
जिन आँखों में हया भी थी,कज़ा अब आ गयी है क्या?

वो नदियों के किनारो पर जहाँ जाता था मिलने को,
वो नदियां है क्यों प्यासी सी, बुलाती है बुलाने को,
उन्ही नदियों की रहो में रुकावट आ गयी है क्या?

नहीं देखा कभी जिसको वही शर्मा गयी है क्या?
    …atr

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Hi everyone. This is Abhishek from Varanasi.

6 Comments

  1. Panna - October 6, 2015, 11:27 pm

    kya baat he abhishek bhai

  2. Mohit Sharma - October 8, 2015, 12:30 am

    laazbaab dost!

  3. Anjali Gupta - October 8, 2015, 12:45 am

    gud one yaar

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