छुपा लूँ क्या

तेरी आँखों के बिस्तर पर अपने प्यार की चादर बिछा दूँ क्या?
तेरे ख़्वाबों के तकिये के सिरहाने मैं सर टिका लूँ क्या?
कर दूँ मैं मेरे दिल के जज़्बात तेरे नाम सारे,
दे इजाज़त के तेरी आँखों से मेरी आँखें मिला लूँ क्या?
अच्छा लगता है मुझे तेरी पलकों का आँचल,
तू कहे तो खुद को इस आँचल में छुपा लूँ क्या?
राही (अंजाना)


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 
यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|
 

Related Posts

इलज़ाम

सरेआम रक्खे हैं।

बैठी है

बैठी है

जवाब माँगता है

4 Comments

  1. Profile photo of Neetika sarsar

    Neetika sarsar - April 8, 2017, 3:30 pm

    nice

  2. Profile photo of Mithilesh Rai

    Mithilesh Rai - April 8, 2017, 2:48 pm

    बहुत खूब

Leave a Reply