छल

ख्वाबों में आकर वो हमसे रोज़ मिलते रहे,
और हम मासूम बस उनसे यूँहीं छलते रहे।।
राही (अंजाना)

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6 Comments

  1. Bidya - July 31, 2018, 10:39 am

    Badhiya h

  2. ज्योति कुमार - July 31, 2018, 8:51 pm

    Waah

  3. Neha - July 31, 2018, 8:52 pm

    Nice

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