छलावा

संवेदनाएँ भी अपना अस्तित्व भूल गई हैं,
शायद वेदनाएँ मुखौटा पहन कर मिली होंगी उनसे।

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By Ram

3 Comments

  1. Lucky - January 26, 2018, 11:13 am

    बहुत बहतरीन मेरी रचना प्रतियोगिता में है आप कमेन्ट करें

  2. राही अंजाना - July 31, 2018, 11:54 pm

    Waah

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