चेहरे के हर भाव पढ़ने लगती है,

चेहरे के हर भाव पढ़ने लगती है,

चेहरे के हर भाव पढ़ने लगती है,
जब कोई लड़की बढ़ने लगती है,

कहती कुछ नहीं मुख से फिरभी,
चुप्पी आँखों में गढ़ने लगती है,

खेल खिलौनों संग खेलने वाली,
रिश्तों के अंदर ही कुढ़ने लगती है,

लेकर अपने स्वप्नों को संग में,
जीवन की सीढ़ी चढ़ने लगती है।।

राही (अंजाना)

Previous Poem
Next Poem
Spread the love

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

4 Comments

  1. Neha - May 30, 2018, 8:00 pm

    Superb

  2. Mithilesh Rai - May 30, 2018, 8:16 pm

    बहुत खूब

Leave a Reply