चल कोई ख़्वाब निचोड़ा जाये

कब तलक ख़ुद को समेटा जाये,
चल कोई ख़्वाब निचोड़ा जाये…

कोई आया नहीं अपना हमारे कारवां में
चलो आज कोई पराया जोड़ा जाये..

जिंदगी चली जा रही है सीधी सी
आज इसे कहीं और मोड़ा जाये..

भर गयी है गुल्लक ख़्वाबों की
चलो आज इसे फोड़ा जाये…

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2 Comments

  1. Dev Rajput - December 28, 2017, 1:19 pm

    thanks

  2. Profile photo of Ria

    Ria - January 10, 2017, 1:54 am

    Bahut Khoob kaha hai

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