गुस्ताखियाँ

यूं तो अरमानों के इरादे भी परेशान हैं,
पानी की बूँदें भी आँखों की बारिश से हैरान हैं|
पर जनाब हमारी गुस्ताखियों की भी हद नहीं होती,
ऐसी केफ़ियत में अपनी ही परछाई में सुकून ढूँढ लिया करते हैं|

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

2 Comments

  1. Varsha Kelkar - May 13, 2018, 5:41 pm

    nice poem bhoomi

Leave a Reply