गुरु

गुरु ज्ञान भण्डार समेटे, कभी न अपनी आँखे मींचे,

शिक्षा के दीपक प्रकाश से हर जन के जीवन को सींचे,

गुरु न देखे जाति धर्म, न मन में कोई संशय कीजे,

गुप्प अँधेरे में भी दृढ सन्कल्प में उसका हर क्षण बीते।।
राही (अंजाना)

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4 Comments

  1. Mahtab - July 27, 2018, 11:22 pm

    sach baat hai

  2. Neha - July 28, 2018, 10:49 am

    Waah

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