गुणों की महक

प्रातः अभिवादन

**गुणों की महक”**
***?**?**??
गुणों के गुलों की महक गुदगुदाए ,
गुणों की महक ,जिंदगी महक जाए।
लगाएँ नयी पौध नित , सदगुणों की ,
वसंत आए ,आकर कभी भी न जाए।

******जानकी प्रसाद विवश ******
सभी प्यारे मित्रों को ,
गुणी सवेरे की ,
प्यार भरी शुभकामनाएँ…।
सपरिवारसहर्ष स्वीकार कर
अनुगृहीत करें ।

आपका अपना मित्र
जानकी प्रसाद विवश

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1 Comment

  1. ashmita - March 19, 2018, 8:32 am

    Subh Prabhat

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