गीत

“गीत”
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हे!री सखी कैसे भेजूं ,
प्रिय को प्रणय निवेदन।
दूर देश विदेश भय हैं
वो मन का मेरे प्रिय साजन।
हे! री सखी कैसे करू मै,
स – श्रृंगार मन यौवन।
हे!री सखी कैसे भेजूं ,
प्रिय को प्रणय निवेदन।
सावन आ कर बहक गया,
दामनि लगे है मोहे डरावन।
हे! री सखी कैसे पाऊँ मै,
साजन का वो प्रिय आलिंगन।
हे!री सखी कैसे भेजूं ,
प्रिय को प्रणय निवेदन।
जब – जब देखूं मैं दर्पण
होता मन में है स्पंदन।
हे! री सखी कैसे कहूं मैं
भौरों का है गीत मनभावन।
हे!री सखी कैसे भेजूं ,
प्रिय को प्रणय निवेदन।
पतझड़ आकर जिया जलाएं
सूना हो गया है उप वन।
हे ! री सखी कैसे बतलाऊं
प्रीत मिलन बिन सूना जीवन।
हे!री सखी कैसे भेजूं ,
प्रिय को प्रणय निवेदन।

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योगेंद्र कुमार निषाद ,
घरघोड़ा ,छत्तीसगढ़,४९६१११
मो.७०००५७११२५

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1 Comment

  1. राही अंजाना - July 31, 2018, 10:46 pm

    Waah

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