गीत होठो पे समाने आ गये है

गीत होठो पे समाने आ गये है
प्रीत भावो के सजाने आ गये है
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चाह ले के आस छाके गा रही है
साज ओढे ताल लुभाने आ गये है
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रीत गाने के सदाये दे रहे है
भाव ले के तान भाने आ गये है
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चाव गाने का हमारा है नही पर
भाव ले के चाव छाने आ गये है
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आज मेरा दौर फीका भी नही है
बात मीठी सी सुझाने आ गये है
💲श्याम दास महंत 💲

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2 Comments

  1. Neha - June 22, 2018, 9:53 am

    Nice sir

  2. राही अंजाना - June 30, 2018, 3:54 pm

    Waah

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