ख्वाब

कुछ ख्वाब ऐसे थे,
कुछ ख्वाब वैसे थे,
कुछ दिल के हिस्से थे,
कुछ दर्द के किस्से थे,
कुछ खुदा को समझाने थे,
कुछ खुद को समझने थे,
कुछ टूटकर रह गए,
कुछ अश्क संग बह गए,
कुछ आदत बन गए,
कुछ भूल बन गए,
कुछ ख्वाब ऐसे थे,
कुछ ख्वाब वैसे थे!
( निसार)

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2 Comments

  1. Vipul Mishra - May 20, 2017, 12:23 pm

    बेहतरीन

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