खुद्दारी

खुद्दारी

इतनी खुद्दारी थी मुझमें के भिखारी हो गया,
हर रिश्ता जैसे मुझपर ही भारी हो गया,
संबंधों की सारी फहरिस्त झूठी निकली,
एक जानवर जब मेरे जीवन की सवारी हो गया॥
राही (अंजाना)

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1 Comment

  1. ज्योति कुमार - July 21, 2018, 5:58 am

    Waah

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