खालीपन

शब्द छलकते रहते है
अनवरत
आँखों से |
और मैं
उन्हें श्याही बना कर
भरता रहता हूँ
कोरे कागजो का
खालीपन |

-Bhargav Patel (अनवरत)

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5 Comments

  1. Panna - January 21, 2017, 5:09 pm

    लफ़्ज ब लफ़्ज आईना है मिरे दिल का
    इसे रद्दी न समझना, मोहब्बत है मिरी |

  2. देव कुमार - January 23, 2017, 11:35 am

    Nice

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