किसी साज़ की आवाज़

किसी साज़ की आवाज़

किसी साज़ की आवाज़ ने मेरे दिल को छुआ ही नहीं कबसे,
तुम्हारी साँसों के समन्दर की आवाज़ में मैं डूब गया जबसे।।
– राही (अंजाना)

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

2 Comments

  1. ज्योति कुमार - September 10, 2018, 11:19 pm

    Awesome line

Leave a Reply