किसी ने ग़म दिया मुझको किसी ने घोंप दी खंजर

किसी ने ग़म दिया मुझको किसी ने घोंप दी खंजर

किसी ने ग़म दिया मुझको किसी ने घोंप दी खंजर ,

नहीं फिर प्रेम उग पाया रही दिल की ज़मी बंजर ।

मैं बर्षों से वही बैठा जहाँ तुमने कहा रुकना ,

जुदाई देख ली मैंने बडे अदभुत रहे मंजर ।।

हरेन्द्र सिंह कुशवाह

~~~एहसास~~~


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तुमसे हैं सब एहसास मेरे

मन में

देखना उनकी नियत भी बे-असर हो जायेगी

3 Comments

  1. Onyiro Promise - August 1, 2017, 7:35 pm

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  2. Nitika Verma - November 8, 2016, 2:51 pm

    जो दिया जमाने ने हमने हंसते ले लिया
    हंसते हंसते ही हो गयी, जिंदगी की गुजर

  3. Anjali Gupta - November 8, 2016, 2:16 pm

    किसी ने ग़म दिया मुझको किसी ने घोंप दी खंजर ,

    नहीं फिर प्रेम उग पाया रही दिल की ज़मी बंजर ।….very nice!

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