किसान

किसान

दाने दाने को तरसे क्यों जो बीज यहाँ पर बोए,

अपने ही बच्चों की खातिर क्यों वो भूखा सोए,

अपनी मेहनत का वो क्यों न उचित मूल्य पिरोये,

सपनों में रंग भरने को वो क्यों अपने जीवन को खोए।।

राही (अंजाना)

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5 Comments

  1. Bidya - July 28, 2018, 2:44 pm

    ?? sahi h

  2. ज्योति कुमार - July 29, 2018, 12:18 am

    Dil ko bha gaya sir g

  3. Neha - July 29, 2018, 10:24 am

    Waah

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