किनारा

कश्ती पर सवार है जिंदगी
ना जाने कब मिलेगा किनारा

दूर से तो दिख रहा है
खुबसूरत हर एक नजारा

फ़िर रहा हूँ मैं मारा मारा
दिल में है आशा पोहचु में उसी किनारे पे
जहा हो खुबसूरत हर एक नजारा

मिलें मुझे उसी की बांहों का सहारा
जो मुझे चाहे उसे में चाहूँ
हमारे प्यार से चहक उठे जग सारा

क्या ऐसा होगा सोचता हूं तो लगता है
जैस कोइ सपना हो प्यारा

कश्ती पर सवार है जिंदगी
ना जाने कब मिलेगा किनारा

दूर से तो दिख रहा है
खुबसूरत हर एक नजारा

Previous Poem
Next Poem
Spread the love

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

4 Comments

  1. राही अंजाना - June 29, 2018, 2:06 pm

    वाह

  2. ज्योति कुमार - June 29, 2018, 4:30 pm

    बाह

  3. Neha - July 1, 2018, 10:53 am

    Nice

  4. shuklawatsushma - July 4, 2018, 1:14 pm

    Thanks Neha!

Leave a Reply