कितनी दफ़ा उँगलियाँ अपनी जला दी तूने

कितनी दफ़ा उँगलियाँ अपनी जला दी तूने…
‘माँ’ मेरे लिए चंद, रोटियाँ फुलाने में !

कितनी दफ़ा रातें गवां दी,
“माँ” तूने मुझे सुलाने में,

कितनी दफ़ा आँचल भिगा दिया,
“माँ” तूने मुझे चुपाने में,

कितनी दफ़ा छुपा लिया,
“माँ” बुरी नज़र से तूने मुझे बचाने में,

कितनी दफ़ा बचा लिया,
“माँ” गलत राह तूने मुझे जाने में,

कितनी दफ़ा लुटा दिया खुद को,
“माँ” तूने मुझे अमीर बनाने में॥

कितनी दफ़ा..
– राही

Previous Poem
Next Poem
Spread the love

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

8 Comments

  1. Neha - May 11, 2018, 9:50 pm

    Bhut bdiya

  2. Ravi - May 12, 2018, 1:48 pm

    Waah

  3. Shruti - May 12, 2018, 2:49 pm

    Nice

  4. Ujjwal - May 12, 2018, 10:11 pm

    Waah

  5. Baba - May 13, 2018, 9:17 am

    Mst

  6. Salman - May 13, 2018, 9:23 am

    Waah

  7. Alka - May 13, 2018, 9:30 am

    Waah

  8. Shakku - May 13, 2018, 9:48 am

    Okay

Leave a Reply