काश मैं होती तितली रानी

काश मैं होती तितली रानी
सबके मन को भाया करती
रंग बिरंगे पंखों से मैं
बच्चों को भी खूब लुभाती
दुनिया भर में घूमा करती
न कोई बंधन में मैं बंधती
खुले गगन की सैर हो जाती
फूल फूल का रस पी जाती
कोई भी सीमा लाँघ मैं जाती
अपने प्यारे पंखों का रंग
तुम्हारे हाथ भी छोड़ मै जाती।।

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

By Neha

6 Comments

  1. राही अंजाना - July 10, 2018, 3:07 pm

    Waah

  2. ज्योति कुमार - July 10, 2018, 5:23 pm

    वाह

  3. Neha - July 10, 2018, 6:57 pm

    Thank u

  4. शिवम् दांगी - July 10, 2018, 7:24 pm

    सुन्दर

  5. Neha - July 10, 2018, 9:33 pm

    Thanks

Leave a Reply