कविता

कविता
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ये जीवन सरिता ,तुम युं ही बहते रहना।
कल कल कर मधुर नांद सै बहते रहना।
गर.. लाख मुस्किलें हो राहो मे पर भी,
एक लक्ष्य बना ,और आगे बडते रहना ।

गर ठहरे पल भर को कहीं,
रह जाओगें बंध कर वही कें वही।
ठान लो समय अनुरुप बढ़ना है आगे,
सोच, यही मंजिल तो होगी कही न कही।

तुम सघर्ष से घबराकर,
कही पथ भ्रष्ट न हो जाना।
यह सघर्ष ही जीवन है,
इससे तुम कभी न डर जाना।

निर्भय होकर सिचों निर्मल धारा,
यह सदियो से प्यासी है यह धरा।
खिला दो इन पत्थरों मे भी फुल,
यही है .. हाँ यही है लक्ष्य तुम्हारा
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योगेन्द्र कुमार निषाद
घरघोड़ा
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