कमाल

लड़ते लड़ते ज़माने की रीतिरिवाजों से थक गया हूँ,
मगर कमाल ये ही की मैं अब भी किताब पढ़ता हूँ।।
राही (अंजाना)

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1 Comment

  1. ashmita - June 22, 2018, 8:04 pm

    nice

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