कब तक मै यूँ ख़ामोश रहूँगा

कब तक मै यूँ ख़ामोश रहूँगा,
अब मुझे तू शब्दों में बयां हो जाने दे,

कब तक मै राहों में यूँ भटकता रहूँगा,
अब मुझे तू अपनी मन्ज़िल हो जाने दे,

कब तक मैं यूँ तेरे ख़्वाबों में रहूंगा,
अब तू मुझे अपनी हकीकत हो जाने दे,

कब तक में यूँ तनहा रहूंगा,
अब तू मुझे अपनी महफ़िल हो जाने दे,

कब तक मैं यूँ टूटता पत्थर रहूंगा,
अब तू मुझे अपनी रूह हो जाने दे॥
Raaही

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

4 Comments

  1. Neha - May 24, 2018, 3:29 pm

    Very nice

  2. Mithilesh Rai - May 24, 2018, 4:28 pm

    Very nice

Leave a Reply