ए वक्त अब उससे दुर ना कर ।

ए वक्त अब उससे दुर ना कर ।

ए वक्त अब उससे दुर ना कर ,
ए वक्त इतना मुझे मजबुर मत कर।
वरना टुट जाऊँगी,
उसके बिना मुझे उससे इतन दुर ना कर,
क्योकि उसके साथ जीना फुलवारी लगता,
उसके साथ चले बिना मरना भी भारी लगता,
नींद आती मगर उसके बिना मै सो नही पाता,
मेरे आँख से कोई पुछ उसके याद मे अपना सारा अश्क निचोड़ डाला।
ए वक्त मुझे इतना मजबुर ना कर।।

ज्योति
मो न० 9123155481

Previous Poem
Next Poem
Spread the love

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

3 Comments

  1. Mithilesh Rai - June 8, 2018, 7:10 am

    बहुत खूब

  2. राही अंजाना - June 20, 2018, 11:42 pm

    वह

Leave a Reply