एक छोटी सी शीशी में गिरतार हो गई

एक छोटी सी शीशी में गिरतार हो गई

एक छोटी सी शीशी में गिरतार हो गई,

भला कैसे ये जिंदगी शर्मोसार हो गई,

यूँ तड़पी बेहद फिर तार-तार हो गई,

बेरुखी दुनियाँ भी तो बार-बार हो गई,

क्यों छिपती-छिपाती मेरी लाज एक दिन,

हर किसी की नज़रों के आर पार हो गई।।

राही (अंजाना)

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7 Comments

  1. देव कुमार - June 14, 2018, 8:50 pm

    Bahut khoob

  2. Mithilesh Rai - June 15, 2018, 4:43 am

    बहुत सुन्दर

  3. Neha - June 15, 2018, 8:38 pm

    Osm

  4. देव कुमार - June 18, 2018, 3:23 pm

    Welcome

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