इलज़ाम

उसने बेबुनियाद इल्जामों की मुझपर फहरिस्त लगा दी,

जीवन कटघरे को मानों जैसे हथकड़ी लगा दी,

छटपटाते रहे मेरे जवाब किसी मछली से तड़पकर,

और सवालों की उसने मानों कीलें सी चुभा दी,

बेगुनाह था मगर फिर भी खामोशी साधे रहा,

मग़र उसने तो सारे लहजों की धज्जियाँ उड़ा दी॥
राही (अंजाना)


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 
यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|
 

Related Posts

सरेआम रक्खे हैं।

बैठी है

बैठी है

जवाब माँगता है

मेरी आँखों में

1 Comment

  1. Profile photo of Neetika sarsar

    Neetika sarsar - May 2, 2017, 2:00 pm

    bahut khoob

Leave a Reply