इज्जत

बहुत कुछ कहते कहते रुक जाया करते हैं,
बात ये है के हम इज्जत कर जाया करते हैं,

रखते हैं अल्फ़ाज़ों का समन्दर अंदर अपने,
और ख़ामोशी से दिल में उतर जाया करते हैं,

प्रश्न ये बिल्कुल नहीं के उत्तर मिलता नहीं हमें,
जंग ये है के हम जवाबों में उलझ जाया करते हैं,

हाथों की लकीरों पर “राही” हम चला नहीं करते,
तो क्या हुआ मन्ज़िल के मुहाने पर तो जाया करते हैं।।
राही (अंजाना)

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4 Comments

  1. Panna - November 20, 2018, 1:29 pm

    bahut khoob sir

  2. ज्योति कुमार - November 22, 2018, 7:56 am

    बहुत सुन्दर बेमिसाल

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