इक लौ जलाकर आया हूं अंधेरों में कहीं

इक लौ जलाकर आया हूं अंधेरों में कहीं
ख्वाहिश है के वो कल तक सूरज बन जाये

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2 Comments

  1. Mithilesh Rai - May 27, 2018, 4:24 pm

    बहुत खूब

  2. शकुन सक्सेना - May 30, 2018, 7:56 am

    Khoob

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