आ जाओ,

आ जाओ सावन की ये वर्षात तुझे बुला रही है
तेरे बीना ये सावन की बुँद मुझे जला रही है।
Jp singh

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2 Comments

  1. Mahtab - July 27, 2018, 11:24 pm

    nice bro

  2. राही अंजाना - July 28, 2018, 10:45 am

    Shi

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