आवाज

बातों में से बात निकलती है,
चुप रहता हूँ आवाज़ निकलती है,
शब्दों का ही खेल है मानो,
जैसे समन्दर से सौगात निकलती है।

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1 Comment

  1. ज्योति कुमार - June 29, 2018, 4:30 pm

    वाह

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