आवाज़

हिल रही उन्माद में,
ये धरती आज है,
हो चली है आंख,
बनके अब आवाज है,
कारवों पे कारवा
कर रहा आगाज है ।

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2 Comments

  1. jyotikauski7549 - May 21, 2018, 6:55 am

    बहुत अच्छा

  2. Deepika - May 21, 2018, 9:44 am

    nice

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