आपकी मुसकान

आपकी
मुसकान के
आधीन,
यह दिल हो चुका ।
अब नाजा
जीते जी
कभी भी
हो सके आजाद यह ।
अब
इवादत
प्यार की ,
करता रहेगा उम्र भर ।
इनायत
या शिकायत
की.,
करेगा फरियाद यह ।

Previous Poem
Next Poem
Spread the love

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Leave a Reply