आज फिर …

कुछ लिख कर आज फिर
मिटा दिया,
कुछ बना कर आज फिर
बिगाड़ दिया,
वो आज भी नहीं आएगा
मालूम है हमे, पर
फिर भी उसके आने के
इन्तजार मे खुद को फिर
सँवार लिया !

Previous Poem
Next Poem
Spread the love

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

4 Comments

  1. Ramesh Singh - May 22, 2017, 8:51 pm

    Behtareen panktiya

  2. Anirudh sethi - May 22, 2017, 9:40 pm

    nice

  3. Kumar Bunty - May 22, 2017, 10:38 pm

    GOOD

  4. Vipul - May 22, 2017, 11:27 pm

    बेहतरीन

Leave a Reply