आओ तन मन रंग लें

आओ तन मन रंग लें

चली बसंती हवाएँ ,

अल्हड़ फागुन संग,

गुनगुनी धूप होने लगी अब गर्म,

टेसू ,पलाश फूले,

आम्र मंज्जरीयों से बाग हुए सजीले,

तितली भौंरे कर रहे ,

फूलो के अब फेरे ,

चहुंँ दिशाओं में फैल रही,

फागुन की तरूणाई,

आओ तन मन रंग लें,

हम मानवता के रंग ,

भेद-भाव सब भूल कर,

आओ खेलें रंगों का ये खेल ,

प्रेम , सौहार्द के भावों से,

हो जाए एक-दूजे का मेल,

होली पर्व नहीं बस रंगो का खेल,

प्रेम , सौहार्द के भावों का है ये मेल ।।

 

 

 


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6 Comments

  1. Abhay Dhopawkar - March 7, 2017, 5:03 pm

    बहूत ही बढिया,रितू जी

  2. Shakun Saxena - March 7, 2017, 2:47 pm

    Waah

  3. Profile photo of Sridhar

    Sridhar - March 6, 2017, 7:36 pm

    behatreen ji

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