आँगन

तेरी यादों के आँगन में मेरा मन खिल जाये,
जैसे खुली हवा में कोई पंछी मण्डराये,
तेरी समृति की छवियों का जब लगे मेला,
मेरा शांत उम्मीदों का फिर मन भर जाए।।
राही (अंजाना)

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3 Comments

  1. ज्योति कुमार - July 10, 2018, 9:01 pm

    सुपर

  2. Neha - July 10, 2018, 9:30 pm

    Waah

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