अन्धकार

रात का अन्धकार हूँ मैं
मुझमे रौशनी भरने के आश में
खुद जल कर मिट जाओगी,
लेकिन यह अँधेरा कभी
सूर्य का तेज नहीं देगा |

-Bhargav Patel (अनवरत)

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3 Comments

  1. दीपक पनेरू - January 22, 2017, 9:20 am

    nice poem

  2. Anjali Gupta - January 22, 2017, 9:23 am

    beautiful 🙂

  3. देव कुमार - January 23, 2017, 11:33 am

    Bahut KHoob

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