अंदाज़

हाथों की लकीरों की आवाज़ सुनानी होगी,
अब दिल में छुपी जो हर बात बतानी होगी,

खामोश रहने से कुछ मिलता नहीं सफ़र में,
अब खुद से ही खुद को पुकार लगानी होगी,

अंदाज़ यूँही तेरा समझ जाये वो महफ़िल ये नहीं,
मानो “राही” यहाँ कोई तो और तरकीब लगानी होगी,

बन्द मुट्ठी में तो नज़र किसी को आने नहीं वाली,
तो खोल कर ही किस्मत सबको दिखानी होगी।।

राही (अंजाना)

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

2 Comments

  1. Panna - November 3, 2018, 11:43 am

    बेहतरीन अंदाज

Leave a Reply